जैसलमेर। मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में दुर्लभ वन्यजीव कैराकाल के संरक्षण की दिशा में राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने महत्वपूर्ण पहल की है। तनोट क्षेत्र में कमजोर अवस्था में मिली एक मादा कैराकाल को उपचार और विशेषज्ञों की निगरानी के बाद स्वस्थ होने पर रेडियो-कॉलर लगाकर उसके प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक छोड़ दिया गया।
मादा कैराकाल को 1 सितंबर को तनोट इलाके में स्थानीय ग्रामीणों ने बेहद कमजोर अवस्था में देखा था। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कैराकाल को सुरक्षित रेस्क्यू कर संरक्षण में लिया।
24 घंटे विशेषज्ञों की निगरानी में रहा कैराकाल
रेस्क्यू के बाद वन विभाग के कर्मचारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने कैराकाल के स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी। इस दौरान उसे आवश्यक देखभाल और उपचार दिया गया। विशेषज्ञों ने उसके स्वास्थ्य की स्थिति का आकलन करने के बाद यह सुनिश्चित किया कि वह प्राकृतिक परिस्थितियों में रहने और शिकार करने में सक्षम है।
स्वास्थ्य में सुधार के बाद 20 सितंबर को मादा कैराकाल को रेडियो-कॉलर लगाकर उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ दिया गया।
जैसलमेर में दूसरी बार कैराकाल को लगाया गया रेडियो-कॉलर
राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास से की गई यह कार्रवाई जैसलमेर में विशेष महत्व रखती है। वन विभाग के अनुसार, किसी कैराकाल को रेडियो-कॉलर लगाकर प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने का यह दूसरा मौका है।
इससे पहले 25 जनवरी को एक नर कैराकाल को भी रेडियो-कॉलर लगाकर प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया था। इसके जरिए कैराकाल की गतिविधियों और उसके आवास क्षेत्र की वैज्ञानिक तरीके से निगरानी की जा रही है।
कैमरा ट्रैप और सैटेलाइट डेटा से होगी निगरानी
रेडियो-कॉलर लगाए जाने के बाद अब मादा कैराकाल की गतिविधियों पर वैज्ञानिक तरीके से नजर रखी जाएगी। निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप और सैटेलाइट डेटा का उपयोग किया जाएगा।
इस वैज्ञानिक निगरानी से विशेषज्ञों को कैराकाल के व्यवहार, उसकी आवाजाही, शिकार की आदतों और क्षेत्र में उसके वितरण को समझने में मदद मिलेगी। प्राप्त आंकड़े भविष्य में कैराकाल के संरक्षण और उसके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी रणनीतियां तैयार करने में महत्वपूर्ण आधार प्रदान कर सकते हैं।
मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण प्रजाति
कैराकाल राजस्थान के शुष्क और मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक दुर्लभ वन्यजीव है। जैसलमेर जैसे मरुस्थलीय क्षेत्र में इसकी मौजूदगी पारिस्थितिकी तंत्र की जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
रेडियो-कॉलर के माध्यम से होने वाली वैज्ञानिक निगरानी से इस दुर्लभ प्रजाति की गतिविधियों और आवास को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई जा सकेगी। इससे भविष्य में कैराकाल के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक आधार पर योजनाएं तैयार करने में वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों को मदद मिलेगी।










