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जैसलमेर में विवादित रील पर बवाल: जिला कार्यक्रम अधिकारी को हटाने की मांग

✍ भादरसिंह राजपुरोहित ⌖ जैसलमेर , राजस्थान ◷ 10 min ◷ 22 Aug 2026
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जैसलमेर में विवादित रील पर बवाल: CMHO के तबादले के बाद धार्मिक प्रसंग साझा करने पर उठे सवाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी को हटाने की मांग

जैसलमेर। स्वास्थ्य विभाग के एक कार्यालयी ग्रुप में भगवान श्रीराम और भगवान परशुराम से जुड़ी एक रील साझा किए जाने के बाद जैसलमेर में विवाद खड़ा हो गया है। मामला उस समय और संवेदनशील हो गया, जब यह रील तत्कालीन CMHO डॉ. आर.के. पालीवाल के जिले से बाहर तबादले के बाद साझा किए जाने की बात सामने आई। रील में भगवान श्रीराम और भगवान परशुराम के बीच संवाद तथा भगवान श्रीराम द्वारा भगवान परशुराम का कथित रूप से “अहंकार तोड़े जाने” का प्रसंग दिखाया गया है। इसे लेकर ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों में नाराजगी बताई जा रही है और जिला कार्यक्रम अधिकारी को पद से हटाने की मांग उठ रही है।

मामले में विवाद केवल धार्मिक प्रसंग तक सीमित नहीं है, बल्कि रील साझा किए जाने की टाइमिंग और स्वास्थ्य विभाग के भीतर चल रही कथित प्रशासनिक खींचतान को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सामने आया है कि रील साझा करने वाले जिला कार्यक्रम अधिकारी को वर्तमान CMHO डॉ. मुरलीधर सोनी के करीबी अधिकारी के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में डॉ. आर.के. पालीवाल के तबादले के बाद कार्यालयी ग्रुप में इस तरह की धार्मिक रील साझा किए जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

हालांकि, यहां यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि रील साझा करने वाले अधिकारी की वास्तविक मंशा क्या थी। क्या यह महज एक धार्मिक प्रसंग था या इसके पीछे किसी विशेष संदर्भ अथवा संदेश का उद्देश्य था—यह बात बिना निष्पक्ष जांच के तय नहीं की जा सकती। इसलिए पूरे मामले में तथ्यों की जांच होना जरूरी माना जा रहा है।

धार्मिक प्रसंग को लेकर ब्राह्मण समाज में नाराजगी

डॉ. आर.के. पालीवाल के ब्राह्मण समाज से होने के संदर्भ में समाज के प्रतिनिधियों ने रील को लेकर आपत्ति जताई है। समाज के लोगों का कहना है कि भगवान परशुराम उनके आराध्य हैं और उनके धार्मिक प्रसंग को किसी अधिकारी के तबादले अथवा विभागीय विवाद के संदर्भ में जोड़कर प्रस्तुत किया जाना उचित नहीं है।

समाज के प्रतिनिधियों का सवाल है कि सरकारी कार्यालय के आधिकारिक ग्रुप का उद्देश्य प्रशासनिक एवं विभागीय सूचनाओं का आदान-प्रदान करना है। ऐसे में अधिकारियों के बीच कथित विवाद और तबादले के घटनाक्रम के बीच धार्मिक प्रसंग वाली रील साझा करने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?

यही सवाल अब इस पूरे विवाद का केंद्र बन गया है।

रील की टाइमिंग ने बढ़ाया विवाद

इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा चर्चा रील की टाइमिंग को लेकर हो रही है। डॉ. आर.के. पालीवाल के तबादले के बाद रील साझा किए जाने के कारण इसे स्वास्थ्य विभाग के भीतर चल रही कथित खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि, केवल टाइमिंग के आधार पर किसी अधिकारी की मंशा पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं होगा। यदि रील को लेकर कोई शिकायत सामने आती है तो विभागीय स्तर पर उसकी जांच कर यह देखा जाना चाहिए कि रील किस उद्देश्य से साझा की गई, उसका संदर्भ क्या था और क्या सरकारी कार्यालय के आधिकारिक ग्रुप में इस तरह की सामग्री साझा करना सेवा नियमों अथवा कार्यालयी मर्यादा के अनुरूप था।

जिला कार्यक्रम अधिकारी को हटाने की मांग

विवाद के बाद ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों और नाराज कर्मचारियों की ओर से जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों के समक्ष जिला कार्यक्रम अधिकारी को वर्तमान पद से हटाने की मांग उठाई गई है।

मांग करने वालों का कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में अधिकारी का आचरण नियमों के विपरीत पाया जाता है या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की मंशा सामने आती है, तो नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रशासन के सामने अब असली परीक्षा

मामला अब जिला प्रशासन के सामने पहुंचने की स्थिति में है। खास बात यह है कि विवाद में एक तरफ धार्मिक भावनाओं का सवाल है तो दूसरी तरफ सरकारी कार्यालय की मर्यादा और अधिकारियों के बीच कथित प्रशासनिक विवाद की चर्चा है।

ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो, धार्मिक आस्था और सरकारी संस्थानों की गरिमा दोनों का सम्मान होना चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी की ओर से नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोष साबित होने पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।

समाज की ओर से यह भी कहा गया है कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ व्यक्तिगत द्वेष के तौर पर नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं और सरकारी व्यवस्था की गरिमा से जुड़े मुद्दे के रूप में है। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांग प्रशासन के समक्ष शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से रखेंगे।

अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल

पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी कार्यालय के ग्रुप में धार्मिक प्रसंग वाली रील किस संदर्भ में साझा की गई थी? क्या यह सामान्य धार्मिक सामग्री थी या इसके पीछे कोई संदेश था? रील साझा करने का समय CMHO के तबादले के ठीक बाद क्यों रहा? क्या विभागीय अधिकारियों के बीच पहले से कोई विवाद या खींचतान चल रही थी? और यदि शिकायत सामने आती है तो क्या जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा?

फिलहाल, इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। लेकिन इतना जरूर है कि एक सोशल मीडिया रील ने जैसलमेर के स्वास्थ्य विभाग के भीतर चल रही कथित प्रशासनिक खींचतान को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब नजर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों के अगले कदम पर है।