जैसलमेर न्यूज़

स्वर्णनगरी सोनार किला पर तारो का ग्रहण आने वाले सैलानी निराश

✍ The Bagawat Desk ◷ 18 Aug 2026
स्वर्णनगरी आने वाले सैलानी निराश दुर्ग की पहचान पर भारी पड़ रहा तारों का जंजाल
स्वर्णनगरी (जैसलमेर) के सोनार किले (दुर्ग) में फैले बिजली और इंटरनेट के तारों के जंजाल से स्थानीय लोग और पर्यटक बेहद परेशान हैं। ऐतिहासिक धरोहर की खूबसूरती पर यह तारों का जाल एक बड़ा धब्बा साबित हो रहा है, जिससे सैलानियों में काफी निराशा है।
इस समस्या के मुख्य पहलू और इसके प्रभाव नीचे दिए गए हैं:
⚡ धरोहर की खूबसूरती पर ग्रहण
  • फोटोग्राफी में बाधा: जैसलमेर का किला अपनी अनूठी पीले पत्थरों की वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। लेकिन किले की गलियों और दीवारों के आगे झूलते काले तार पर्यटकों की तस्वीरों को खराब कर देते हैं।
  • ऐतिहासिक रूप प्रभावित: तारों के इस मकड़जाल के कारण विश्व धरोहर सूची में शामिल इस जीवंत किले (Living Fort) का मूल ऐतिहासिक स्वरूप छिपता जा रहा है।
⚠️ सुरक्षा और हादसों का खतरा
  • सकरी गलियां: दुर्ग के भीतर की गलियां बेहद तंग और सकरी हैं। ऐसे में नीचे तक लटकते खुले तार हर समय किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देते हैं।
  • शॉर्ट सर्किट का डर: हेरिटेज इमारतों के बीच तारों के आपस में टकराने से आग लगने या शॉर्ट सर्किट होने का खतरा हमेशा बना रहता है।
🌐 समाधान की मांग
  • अंडरग्राउंड केबलिंग: सैलानियों और स्थानीय गाइडों की मांग है कि किले के भीतर बिजली, टेलीफोन और इंटरनेट के सभी तारों को भूमिगत (Underground) किया जाए।
  • प्रशासनिक ढिलाई: समय-समय पर इस मुद्दे को लेकर योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन ठोस धरातलीय कार्रवाई न होने से यह समस्या जस की तस बनी हुई है।
यदि इस तारों के जंजाल को जल्द नहीं हटाया गया, तो यह स्वर्णनगरी के पर्यटन और इसकी वैश्विक पहचान को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।