जैसलमेर राजस्थान में चुनावी बिगुल बजने के साथ ही अब स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बीते 13 अगस्त को पंचायती राज एवं नगरीय निकायों के जिलेवार प्रमुख पदों की लॉटरी निकाले जाने के बाद सोमवार को जैसलमेर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में नगर निकाय चुनावों को लेकर वार्ड आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल की अध्यक्षता में आयोजित लॉटरी प्रक्रिया के दौरान जैसलमेर नगर परिषद के 45 वार्डों तथा पोकरण नगर पालिका के 25 वार्डों सहित कुल 70 वार्डों का आरक्षण तय किया गया।
जैसलमेर नगर परिषद के 45 वार्डों की आरक्षण स्थिति सामने आने के बाद अब चुनावी समीकरण भी तेजी से बदलने लगे हैं। वार्डों के आरक्षण के साथ ही संभावित प्रत्याशियों ने अपने-अपने वार्डों में राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। लंबे समय से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कई दावेदारों को आरक्षण की लॉटरी के बाद अब नए वार्डों की ओर रुख करना पड़ सकता है, जबकि आरक्षित वर्ग के संभावित उम्मीदवारों के लिए चुनावी मैदान में उतरने का रास्ता साफ हुआ है।
जैसलमेर नगर परिषद के 45 वार्डों में अनुसूचित जाति यानी एससी वर्ग के लिए कुल पांच सीटें आरक्षित की गई हैं। इनमें वार्ड संख्या 11, 31 और 38 सामान्य यानी ओपन श्रेणी में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं, जबकि वार्ड संख्या 12 और 39 अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसी तरह अनुसूचित जनजाति यानी एसटी वर्ग के लिए कुल दो वार्ड आरक्षित हैं। इनमें वार्ड संख्या 9 एसटी ओपन तथा वार्ड संख्या 10 एसटी महिला के लिए आरक्षित किया गया है।
अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी के लिए नगर परिषद के कुल नौ वार्ड आरक्षित किए गए हैं। इनमें वार्ड संख्या 14, 15, 17, 18, 20 और 34 ओबीसी ओपन श्रेणी में रखे गए हैं, जबकि वार्ड संख्या 16, 23 और 43 ओबीसी महिला के लिए आरक्षित किए गए हैं। ऐसे में इन वार्डों में ओबीसी वर्ग के संभावित उम्मीदवारों की राजनीतिक गतिविधियां आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
वहीं जैसलमेर नगर परिषद के 45 वार्डों में सामान्य वर्ग के लिए कुल 29 सीटें निर्धारित की गई हैं। इनमें वार्ड संख्या 1, 2, 4, 5, 7, 8, 22, 24, 26, 27, 28, 29, 30, 32, 33, 36, 41, 42 और 45 सामान्य वर्ग के लिए ओपन रखे गए हैं। जबकि वार्ड संख्या 3, 6, 13, 19, 21, 25, 35, 37, 40 और 44 सामान्य महिला के लिए आरक्षित किए गए हैं।
आरक्षण की तस्वीर साफ होने के साथ ही जैसलमेर शहर की सियासत में भी नई हलचल देखने को मिल सकती है। जिन वार्डों में लंबे समय से राजनीतिक दावेदार सक्रिय थे, उनमें से कई वार्ड आरक्षित होने के कारण अब उम्मीदवारों को अपने चुनावी समीकरणों पर दोबारा विचार करना पड़ेगा। वहीं महिला आरक्षित वार्डों में राजनीतिक दलों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर सक्रिय महिला दावेदारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होने वाली है।
सबसे अहम बात यह है कि जैसलमेर नगर परिषद के सभापति पद को सामान्य वर्ग के लिए अनारक्षित रखा गया है। सभापति पद सामान्य होने के बाद अब नगर परिषद की राजनीति में दावेदारों की नजरें पार्षद चुनाव के साथ-साथ सभापति की कुर्सी पर भी टिक गई हैं। ऐसे में आगामी नगर निकाय चुनाव जैसलमेर की स्थानीय राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
वार्ड आरक्षण की लॉटरी के बाद अब राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रत्येक वार्ड में मजबूत उम्मीदवार तलाशने की होगी। वहीं संभावित प्रत्याशी भी अपने सामाजिक समीकरण, जनसमर्थन और वार्ड की नई आरक्षण व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटेंगे। आने वाले दिनों में टिकटों को लेकर राजनीतिक दलों के भीतर मंथन और दावेदारों की सक्रियता जैसलमेर की चुनावी राजनीति को और गरमाने वाली है।

